Description
‘प्राणायाम’ एक योगिक श्व्सनाभ्यास है। इस अभ्यास को, सामंजस्यपूर्ण मानव शरीर क्रियात्मक विकास और अभ्यासेच्छुक के आध्यात्मिक उन्नयन के अनुभवों तथा वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर अत्यंत मूल्यवान पाया गया है। 1931 में प्रथम प्रकाशित Pranayama प्रारंभ से ही अपने सरल सुबोध वैज्ञानिक और क्रमबद्ध प्रतिपादन के कारण लोकप्रिय हो चुका है। इसके पंचम संस्करण के इस हिंदी रूपांतर में स्वामी कुवलयानंद जी ने हठयोग-प्रणेताओं द्वारा प्रणीत आठ प्राणायामो तथा भगवान पतंजलि द्वारा बताये गये प्राणायाम के चार प्रकारों को करने की प्रविधियों को दिया है। अभ्यास को इन प्रविधियों को अच्छी प्रकार चित्रित भी किया गया है। इस पर प्रविधियों को अच्छी प्रकार और सरलता से समझने हेतु लेखक ने प्रथम अध्याय में श्वसन-क्रिया का शरीरात्मक तथा शरीरक्रियात्मक विस्तृत विवरण और अंतिम अध्याय में प्राणायाम अभ्यास के महत्व का प्रस्तुत किया है।
प्राणायाम की अभ्यासेच्छुक के लिए इस प्रकार ‘प्राणायाम’ यह एक विस्तृत, विश्वसनीय और सरलता से बोधगम्य पुस्तक है।






Reviews
There are no reviews yet.